आर्थिक विकास का अर्थ
आर्थिक विकास से अभिप्राय, उस प्रक्रिया से है जिसके फलस्परूप देश के समस्त उत्पादन साधनों का कुशलतापूर्वक दोहन होता है। राष्ट्रीय आय तथा प्रतिव्यक्ति आय में सतत् तथा दीर्घकालीन वृद्धि होती है और जन-सामान्य के जीवन-स्तर एवं सामान्य कल्याण का सूचकांक बढ़ता है।
आर्थिक विकास की परिभाषा
1. मायर एवं बाल्डविन के अनुसार, - “ आर्थिक विकास एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा किसी अर्थव्यवस्था को वास्तविक राष्ट्रीय आय में दीर्घकाल में वृद्धि होती है। "
2. विलियम्स एवं बट्रिक के शब्दों में, - “आर्थिक विकास का अर्थ उस प्रक्रिया से है, जिसमें किसी देश या क्षेत्र के निवासी उपलब्ध साधनों का प्रयोग करके प्रतिव्यक्ति वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन में निरंतर वृद्धि करते हैं।”
3. आर्थर लुईस के अनुसार, - “आर्थिक विकास प्रतिव्यक्ति उत्पादन की मात्रा में वृद्धि को बताता है। प्रतिव्यक्ति उत्पादन वृद्धि एक ओर उपलब्ध प्राकृतिक साधनों पर एवं दूसरी ओर मानवीय व्यवहार पर निर्भर है।"
4. ओकेन तथा रिचर्डसन के अनुसार - “आर्थिक विकास से आशय वस्तुओं को अधिक से अधिक मात्रा में उपलब्ध करने से है, जिससे कि जन सामान्य के भौतिक कल्याण में सतत् व दीर्घकाल में वृद्धि होती है।"
5. ब्राइट सिंह के अनुसार, - “आर्थिक विकास एक बहुमुखी धारणा है। इसके अन्तर्गत केवल मौद्रिक आय में हो वृद्धि शामिल नहीं है, बल्कि वास्तविक आदतें, शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिक आराम के साथ-साथ उन समस्त सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों में सुधार भी शामिल है, जो एक पूर्ण और सुखी जीवन का निर्माण करती है। "
6. संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट - विकास मानव की केवल भौतिक आवश्यकताओं से ही नहीं, बल्कि उसके जीवन को सामाजिक दशाओं की उन्नति से भी संबंधित होना चाहिए। अतः विकास में सामाजिक, सांस्कृतिक, संस्थागत तथा आर्थिक परिवर्तन भी शामिल हैं। "
7. ओवरसीज डेवलपमेंट कौंसिल ऑफ अमेरिका - आर्थिक विकास का अर्थ भौतिक जीवन गुणवत्ता सूचकांक से है।
इस सूचकांक में तीन तत्वों को शामिल किया गया है -
(i) प्रत्याशित आयु
(ii) बच्चों की मृत्यु दर एवं
(iii) साक्षरता जिस देश की प्रत्याशित आयु सबसे अधिक होती है, उसे 100 अंक दिये गये हैं।
इसी प्रकार मृत्यु दर एवं साक्षरता के संबंध में भी अंक दिये गये हैं। जिस देश में प्रत्याशित आयु सबसे कम होती है, उसे अंक देते हैं।
इस प्रकार प्रत्येक देश के तीनों सूचकांक रखकर औसत निकाल लेते हैं। यदि किसी देश के इस औसत सूचकांक में वृद्धि होती रहती है, तो इसे आर्थिक विकास मानते हैं और यह मानते हैं कि भौतिक गुणों में वृद्धि हो रही है।
आर्थिक विकास की उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है, कि -
1. आर्थिक विकास एक प्रक्रिया है। इसके अन्तर्गत एक अर्थव्यवस्था के संस्थागत एवं संरचनात्मक ढाँचे में परिवर्तन होता है।
2. आर्थिक विकास से एक देश की वास्तविक राष्ट्रीय आय निरंतर बढ़ती जाती है।
3. आर्थिक विकास से वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि की दर जनसंख्या वृद्धि की दर से अधिक रहती है।
4. आर्थिक विकास से प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में निरंतर वृद्धि होती है।
5. आर्थिक विकास में वृद्धि दीर्घकालीन होती है अर्थात् राष्ट्रीय आय या प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि 20 से 25 वर्ष तक नियमित रूप से होती है।
6. आर्थिक विकास एक बहुआयामी घटना है। इससे न केवल आर्थिक असमानता, अज्ञानता, रोग-ग्रस्तता, गंदगोमय जीवन में उत्तरोत्तर कमी आनी चाहिए तथा इन्हें पूर्णतया समाप्त किया जाना चाहिए।
आर्थिक विकास |
आर्थिक विकास की विशेषता
1. निरंतर प्रक्रिया -
आर्थिक विकास एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसका अर्थ कुछ विशेष शक्तियों के निरंतूर कार्यशील रहने के रूप में लगाया जाता है। इन शक्तियों के निरंतर गतिशील रहने के कारण आर्थिक घटकों में सदैव परिवर्तन होते रहते हैं। परिवर्तन की यही प्रक्रिया अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में पविर्तन लाती है जिससे अन्त में अर्थव्यवस्था की राष्ट्रीय आय बढ़ जाती है।
राष्ट्रीय आय में होने वाली यह वृद्धि समय के साथ-साथ जनसंख्या वृद्धि से अधिक होनी चाहिए। यदि जनसंख्या में वृद्धि राष्ट्रीय आय में वृद्धि से अधिक या बराबर है तो ऐसी दशा में आर्थिक विकास निरंतर प्रक्रिया नहीं कहलायेगी।
2. वास्तविक राष्ट्रीय आय और प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि -
आर्थिक विकास की निरंतर प्रक्रिया में वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि होनी चाहिए। इसके दो अर्थ है- पहला तो यह कि कुल उत्पादन तथा कुल राष्ट्रीय आय को वृद्धि के साथ-साथ प्रतिव्यक्ति आय भी बढ़नी चाहिए और यह वृद्धि निरंतर हो। दूसरे, वास्तविक रूप में राष्ट्रीय आय का बढ़ना लोगों के रहन-सहन के स्तर में निरंतर वृद्धि का सूचक है।
इस रूप में राष्ट्रीय आय के वास्तविक रूप का संबंध अर्थव्यवस्था के सामान्य मूल्य स्तर से है। जब मूल्य-स्तर में होने वाली वृद्धि राष्ट्रीय आय में होने वाली वृद्धि से कम होती है, तो लोग अपनी बढ़ी हुई प्रतिव्यक्ति आय का उपयोग अधिक वस्तुओं व सेवाओं को प्राप्त करने में करते हैं, जिससे उनका रहन-सहन का स्तर बढ़ जाता है।
3. दीर्घकाल अथवा निरंतर वृद्धि -
आर्थिक विकास की निरंतर प्रक्रिया में आर्थिक विकास विशेषताएँ वास्तविक राष्ट्रीय आय में निरंतर वृद्धि होनी चाहिए। इस वृद्धि का संबंध दीर्घकाल से है, जिसमें कम से कम 15-20 वर्षों का समय लगता है। आर्थिक विकास का संबंध अल्पकाल या एक या दो वर्षों में होने वाले परिवर्तनों से नहीं है।
इसलिए यदि किसी अर्थव्यवस्था में किन्हीं अस्थायी कारणों से देश की आर्थिक स्थिति में सुधार हो जाता है, जैसे- अच्छी फसल, अप्रत्याशित निर्यात आदि का होना, तो इसे आर्थिक विकास नहीं समझना चाहिए।
4. तकनीकी अवधारणा -
आर्थिक विकास एक तकनीकी अवधारणा है, जिसका आशय उत्पादन तकनीक में सुधार से है। यह सुधार प्रशिक्षित एवं कुशल श्रम के रूप में, श्रम-प्रधान तकनीकी के ऊपर पूँजी-प्रधान तकनीक के रूप में, नव-प्रर्वतनों (या नवीन खोजों) एवं अनुसंधानों के रूप में, जीवन स्तर (रहन-सहन का स्तर) में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के रूप में हो सकता है।
5. उच्च जीवन स्तर की प्राप्ति -
आर्थिक विकास का आशय एक अच्छे जीवन तथा उच्च जीवन स्तर को प्राप्त करने से है। इसका संबंध मानवीय विकास तथा मानवीय कल्याण से है। इस तरह आर्थिक विकास का अर्थ जीवन के ऊंचे मूल्यों को प्राप्त करने से है तथा अर्थव्यवस्था में बहुत सी ऐसी आधारभूत बातों को उत्पन्न करने से हैं, जिनका उपयोग अधिकांश लोग कर सके।
6. संरचनात्मक संस्थागत एवं तकनीकी परिवर्तन -
आर्थिक विकास के अन्तर्गत अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक, संस्थागत तथा तकनीकी परिवर्तन भी होने चाहिए। उत्पादन एवं रोजगार के क्षेत्रों में प्राथमिक क्षेत्र से द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों में होने वाला परिवर्तन एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन है। श्रम-प्रधान तकनीक से पूँजी-प्रधान तकनीक को और होने वाला परिवर्तन तकनीकी परिवर्तन है।
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